Sunday, May 30, 2010

यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई...


यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई
इक रौशनी अंधेर में बिखरा गया कोई

वो हादसा वो पहली मुलाक़ात क्या कहूं
इतनी अजब थी सूरत-ए-हालात क्या कहूं
वो कहर वो ग़ज़ब वो जफा मुझको याद है
वो उसकी बेरुखी की अदा मुझको याद है
मिटता नहीं है ज़ेहन से यूं छा गया कोई
यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई

पहले वो मुझको देखकर बरहम सी हो गयी
फिर अपने ही हसीं ख्यालों में खो गयी
बेचारगी पे मेरी उसे रहम आ गया
शायद मेरे तड़पने का अंदाज़ भा गया
सांसों से भी करीब मेरे आ गया कोई
यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई

यूं उसने प्यार से मेरी बाहों को छु लिया
मंजिल ने जैसे शाख के राहों को छु लिया
इक पल में दिल पे कैसे क़यामत गुज़र गयी
रग़-रग़ में उसके हुस्न की खुसबू बिखर गयी
जुल्फों को मेरे शान पे लहरा गया कोई
यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई

अब इस दिल-ए-तबाह की हालत न पूछिए
बेनाम आरज़ू की लज्ज़त न पूछिए
इक अजनबी था रूह का अरमान बन गया
इक हादसा था प्यार का उनवां बन गया
मंजिल का रास्ता मुझे दिखला गया कोई
यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई

Monday, April 19, 2010

मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र....


मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र, मेरे पास आ मेरे साथ चल,
चल चले हम उस राह पर, जहाँ गम ना हों ....हो खुशियाँ उम्र भर

एक घर बसा ले हम कहीं, आ महकाएं ये जिन्दगी ,
जो ख़आब पलकों पर सजें, आ हकीकत वो करें,
प्यार के वो पल बुने, उम्र भर जो कम ना हों

मेरे हमसफ़र .....
प्यार बाटें चल चलें, ना कोई शिकवा शिकन,
ख़ुशी की हो हर दास्ताँ, साथ हो सारा जहाँ,
मैं नहीं और तुम नहीं, चल चलें हम हम बनें

मेरे हमसफ़र .....
प्यार हम करते चलें, प्यार ही देते चलें,
प्यार हो अपना जहाँ और प्यार का हो हर निशां

हर कदम में प्यार का साथ हम देते चलें,
इस जमीं से उस फलक तक,
आ जहाँ को बस प्यार से हम भरते चलें

मेरे हमसफ़र मेरे हमसफ़र
तेरे साथ हो बस उम्र भर .......

तेरा मेरा साथ रहे ...


आप मेरे लिए कोहिनूर से भी अनमोल हो,
ईश्वर करे की आपकी सच्चाई और अच्छाई की आभा,
इसी तरह हमेशा मेरे जीवन को प्रकाशित करती रहे
आपका स्नेह यूँ ही सदैव मेरे ह्रदय को अभिसिंचित करता रहे
आपकी मुस्कुराहट मेरे आँगन को हमेशा यूँ ही महकती रहे
मेरा जीवन आप से ही शुरू होकर आप पर ही सिमट जाता है
मेरी हर राह आप से ही शुरू होकर आप पर ही ठहर जाती है
आँखें बंद करूँ तो मन में सिर्फ आप हैं,
खोलती हूँ तो जीवन में सिर्फ आप हैं

Thursday, April 8, 2010

तुम साथ हो जो अपने...


अकेले थे तो मंजिल नज़र नहीं आती थी,
फासलें मीलों लम्बे हो गये थे,
राह सुनी थी दूर तलक,
खामोश थी जमीं, चुप सा था फ़लक,
तुम जो हमराही बन कर आये तो,
गुनगुनाने लगे है ये जमीं आसमां,
राहें अब आबाद नज़र आती हैं,
मीलों के फासलें भी पल में तै हो जाते हैं,
अब तो लगता है की मानों मंजिल,
खुद चल कर हम तलक आएगी,
और कहेगी .. जो इतना प्यारा हमसफ़र है,
तेरा दोस्त ..... तो क़यामत भी तुम्हारा
क्या बिगाड़ पाएगी ?

इत्तेफाक


लोग मिल जाते है राह चलते, इत्तेफाक होता है
भीड़ में नजरें किसी से मिल जाए, तो भी इत्तेफाक होता है
दो अजनबी शख्सों की आदतें मिले, ये इत्तेफाक ही होता है
पर दिलों का मिलना कभी इत्तेफाक नहीं होता ........

मेरे साथ हो तुम ... मेरे पास हो.


क्या तुम्हें है पता तुम मेरे साथ हो हमेशा
खुशबू की तरह मेरे पास हो हमेशा।
महसूस कर सकते है हम जिसे
वो प्यारा सा अहसास हो हमेशा,
हाँ .. तुम्हें है पता, तुम मेरा विश्वास हो हमेशा,
मेरी ताकत हो, मेरा गर्व हो, मेरा दर्प हो, मेरा अहम हो ,
क्यूंकि तुम मेरे हो और सिर्फ मेरे हो हमेशा।

अब जान गयी की कौन हो तुम.....


हे पथिक कौन हो तुम, जो मेरे जीवन के मर्रुस्थल में,
एक चोर बादल की तरह घुस आये हो,
बारिश की बूँद बनकर क्यूँ तुमने मेरे तप्त हृदय को
शीतल कर दिया है ।
इस तरह अनाधिकार मेरे मन प्रांगण में प्रवेश की चेष्ठा क्यूँ की तुमने ?
मैंने तो अपने मन के और जीवन के सभी द्वारों पर ताले लगाये थे,
फिर तुम कहाँ से अन्दर आ गये ?
मै भी तुम्हारा परिचय जानना चाहती हूँ ।
सच बताऊं तो तुम्हारा यूँ दबे पांव चुपके से
आना न जाने क्यूँ मुझे अच्छा लग रहा है ।
लग रहा है मानो टूट कर गिरने से पहले ही
तुमने मुझे सम्हाल लिया है, और तुम्हारे साथ
मै संसार के हर संकट से सुरक्षित हूँ ।
ठहरो ...एक झण को लगा की मै तुम्हे जानती हूँ ,
सदियों से नहीं शायद जन्म जन्मान्तरों से
हाँ ... मैंने तुम्हे पहचान लिया है।
तुम्ही तो हो मेरा परिचय, मेरा अस्तित्व, मेरी संपूर्णता
तुम मुझमे हो और मै तुम में,
मै जान गयी हूँ की तुम मेरा जीवन हों ....

संपूर्णता....


कुछ बाकी था हम में, कुछ अधूरे थे हम
जाने धड़कने अधूरी थी या साँसे थी कम
क्या था वो खालीपन का एहसास
जैसे सूखे होठों की प्यास।
अब समझ चुके हैं हम,
बस आप ही तो थे जिंदगी में कम
जिंदगी का आधा हिस्सा आप हैं बाकी हम
हो पास जो तुम, अब धडकनें पूरी हैं
आपके प्यार ने जिंदगी के सूनेपन को भर दिया है
हैं कसम ये अहसास ना होगा कम
साथ चलते चलते एक दुसरे का साथ निभायेंगें कदम दर कदम।

आप क्या हो?


नींदों में ख्बाब हैं आप ,
दिल की धड़कन हैं आप
होठों पर हंसी हैं आप
जीवन में ख़ुशी हैं आप
महसूस करते है हम जिन्हें
वो सभी अहसास है आप
झुकी पलकों की हया है आप
हमारे प्यार की वफ़ा हैं आप
इस ज़िस्म की सांसें हैं आप
हमारी तो सभी बातें है आप
हम तो जाने कब के खो चुके है
अब हम में तो बाकी हैं बस आप
लोग बाग़ इसे दीवानगी कहते है
पर हमारी जिन्दगी में तो बस आप ही रहते है।

Wednesday, April 7, 2010

तेरे मेरे सपने अब एक रंग है....


अब तेरे मेरे सपने है साझे,
ये नींद भी साझी, दिन रात भी साझे।
दुःख दर्द भी साझे,
अपने जीवन के सब अर्थ है साझे।
तन मन जीवन सब कुछ साझा है
सांसें साझी, धड़कन साझी, मौसम साझे
जीवन दरिया की हर लहर है साझी।
चुप क्यूँ हो? कुछ तो बोलो ... सुन मेरे माँझी
तेरे होठों की ये चुप भी साझी।

मेरे जीवन साथी


अब मुझमे मेरा, मै शेष कहाँ है?
मेरा सर्वस्व तो आप में समाहित हो गया है
मेरा जीवन तो अब आप में समर्पित हो गया है ।
आप मेरे जीवन में ईश्वर का सबसे अनमोल उपहार है,
आप ही तो मेरा स्नेह है, सार है, संसार है ।

जाने क्या हो गया है मुझे ?



बंद आँखों में एक सपना सजाया है, दिल की गहराइयों से उन्हें अपना बनाया है
उनकी एक मुस्कराहट से रोशन जहाँ हो जाता है, हजारों चिरागों से जगमग आशियाँ हो जाता है
उनके अहसास से हम शरमा जाते है , अब तो हर सफ़र में वो साथ नज़र आते है
अपने हर ख्बाब में हम बस उन्हें ही सजाते है, अब से जिन्दगी का आगाज और अंजाम उन्हें ही बनाते है
अब तो बस वो है और हम है , ना कोई गिले है गम है
उनसे है अब हमारी सुबह, उनसे ही शामों सहर
अब तो बस उनके इंतज़ार में पलकें बिछा कर दिन बिताते है

प्रथम संदेश....



आकांछित है ईश्वर का शुभ आशीष,
आपके स्नेह से झुक गया ये शीश।
करे स्वीकार अभिवादन शुभ कामनाएं ,
हो सम्पूर्ण आपकी सब हृदयगत अभिलाषाएं।

प्रिय





ये तुम्हारी मेरी बातें .... हमेशा यूँ ही चलती रहे .....