
यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई
इक रौशनी अंधेर में बिखरा गया कोई
वो हादसा वो पहली मुलाक़ात क्या कहूं
इतनी अजब थी सूरत-ए-हालात क्या कहूं
वो कहर वो ग़ज़ब वो जफा मुझको याद है
वो उसकी बेरुखी की अदा मुझको याद है
मिटता नहीं है ज़ेहन से यूं छा गया कोई
यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई
पहले वो मुझको देखकर बरहम सी हो गयी
फिर अपने ही हसीं ख्यालों में खो गयी
बेचारगी पे मेरी उसे रहम आ गया
शायद मेरे तड़पने का अंदाज़ भा गया
सांसों से भी करीब मेरे आ गया कोई
यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई
यूं उसने प्यार से मेरी बाहों को छु लिया
मंजिल ने जैसे शाख के राहों को छु लिया
इक पल में दिल पे कैसे क़यामत गुज़र गयी
रग़-रग़ में उसके हुस्न की खुसबू बिखर गयी
जुल्फों को मेरे शान पे लहरा गया कोई
यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई
अब इस दिल-ए-तबाह की हालत न पूछिए
बेनाम आरज़ू की लज्ज़त न पूछिए
इक अजनबी था रूह का अरमान बन गया
इक हादसा था प्यार का उनवां बन गया
मंजिल का रास्ता मुझे दिखला गया कोई
यूं ज़िन्दगी की राह में टकरा गया कोई












