
बंद आँखों में एक सपना सजाया है, दिल की गहराइयों से उन्हें अपना बनाया है
उनकी एक मुस्कराहट से रोशन जहाँ हो जाता है, हजारों चिरागों से जगमग आशियाँ हो जाता है
उनके अहसास से हम शरमा जाते है , अब तो हर सफ़र में वो साथ नज़र आते है
अपने हर ख्बाब में हम बस उन्हें ही सजाते है, अब से जिन्दगी का आगाज और अंजाम उन्हें ही बनाते है
अब तो बस वो है और हम है , ना कोई गिले है न गम है
उनसे है अब हमारी सुबह, उनसे ही शामों सहर
अब तो बस उनके इंतज़ार में पलकें बिछा कर दिन बिताते है
No comments:
Post a Comment